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शब्द निर्माण (उपसर्गप्रत्यय,समास)

शब्द
वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते है!  जैस: कमल मेज पुस्तक
शब्द की दो प्रमुख विशेषताए होते है,
1.शब्द भाषा की सार्थक इकाई होती है!
2.शब्द भाषा की सवतंत्र इकाई होती है!

शब्द निर्माण 
शब्द निर्माण की प्रक्रिया तिन प्रकार से होती है:
1.उपसर्ग 
2.प्रत्यय 
3.समास 

उपसर्ग 
उपसर्ग भाषा के वो लघुतम सार्थक खंड होते है जो शब्द के आरम्भ में लगकर नए नए शब्दों
का निर्माण करते है!
जैसे:   उप + कार = उपकार 

उपसर्ग मुख्या रूप से तिन प्रकार के होते है!
1.तत्सम उपसर्ग 
2.तद्भव उपसर्ग 
3.आगत उपसर्ग 

1.तत्सम उपसर्ग 
वे उपसर्ग जो संस्कृत से हिंदी में आये है! इनकी संख्या 22 होती है!
जैसे: अत्यंत अत्याचार 

2.तद्भव उपसर्ग 
वे उपसर्ग जो मूलतः संस्कृत के उपसर्ग से विकशित हुए है! इन्हें हिंदी के उपसर्ग भी कहा जाता है!
जैसे:अनपढ़अनजान 

3.आगत उपसर्ग 
ये उपसर्ग विदेशी भाषाओ जैसे उर्दूफारसीअंग्रेजी आदि से आये है!
जैसे:सरपंचसरताज

प्रत्यय
कुछ शब्दांश शब्दों के अंत में जुड़कर नए शब्द का निर्माण करते है ऐसे शब्दों को प्रत्यय कहा जाता है!
जैसे:  चाचा + ई = चाची 

प्रत्यय के दो भेद होते है:
1.तद्धित प्रत्यय 
2.कृत प्रत्यय 

1.तद्धित प्रत्यय 
ऐसे शब्दांश जो क्रिया के धातु रूप के आलावा अन्य शब्दों में जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते है,
वो तद्धित प्रत्यय कहलाते है!
जैसेबुढा + आपा = बुढ़ापा 

2.कृत प्रत्यय 
जो प्रत्यय क्रिया के धातु रूप में जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते है उन्हें कृत प्रत्यय कहा जाता है!

कृत प्रत्यय के 5 भेद होते है;

1.कर्तिवाचक कृत प्रत्यय 
2.कर्मवाचक कृत प्रत्यय 
3.करणवाचक कृत प्रत्यय 
4.भाववाचक कृत प्रत्यय 
5.क्रियावाचक कृत प्रत्यय 

समास :
जब दो या दो से अधिक पद बीच की विभक्ति को छोड़कर मिलते है,तो पदों के इस मेल को
समास कहते है।

'समास के भेद '
समास के मुख्य सात भेद है :-

1.द्वन्द समास 2.द्विगु समास 3.तत्पुरुष समास 4.कर्मधारय समास 5.बहुव्रीहि समास 6.अव्ययीभाव समास 7.नत्र समास

1.द्वंद समास :- इस समास में दोनों पद प्रधान होते है,लेकिन दोनों के बीच 'औरशब्द का लोप
होता है। जैसे - हार-जीत,पाप-पुण्य ,वेद-पुराण,लेन-देन ।

2.द्विगु समास :- जिस समास में पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है,उसे द्विगु समास कहते
है। जैसे - त्रिभुवन ,त्रिफला ,चौमासा ,दशमुख

3.तत्पुरुष समास :- जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है। इनके निर्माण में दो पदों के बीच कारक
चिन्हों का लोप हो जाता है। जैसे - राजपुत्र -राजा का पुत्र । इसमे पिछले पद का मुख्य अर्थ लिखा गया है। गुणहीन ,सिरदर्द ,आपबीती,रामभक्त ।

4.कर्मधारय समास :- जो समास विशेषण -विशेश्य और उपमेय -उपमान से मिलकर बनते है,उन्हें
कर्मधारय समास कहते है। जैसे -
1.चरणकमल -कमल के समानचरण ।
2.कमलनयन -कमल के समान नयन ।
3.नीलगगन -नीला है जो गगन ।

5.बहुव्रीहि समास :- जिस समास में शाब्दिक अर्थ को छोड़ कर अन्य विशेष का बोध होता है,उसे
बहुव्रीहि समास कहते है। जैसे -
घनश्याम -घन के समान श्याम है जो -कृष्ण
दशानन -दस मुहवाला -रावण

6.अव्ययीभाव समास :- जिस समास का प्रथम पद अव्यय हो,और उसी का अर्थ प्रधान हो,उसे

अव्ययीभाव समास कहते है। जैसे - यथाशक्ति = (यथा +शक्ति ) यहाँ यथा अव्यय का मुख्य अर्थ
लिखा गया है,अर्थात यथा जितनी शक्ति । इसी प्रकार - रातों रात ,आजन्म ,यथोचित ,बेशक,प्रतिवर्ष ।

7.नत्र समास :- इसमे नही का बोध होता है। जैसे - अनपढ़,अनजान ,अज्ञान ।


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