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Hello! Dear Students Move ahead and find NCERT  Solution of लहासा की ओर!

1.थोंगला के पहले के आख़िरी गाँव पहुँचने पर भिखमंगे के वेश में होने के वावजूद लेखक को ठहरने के लिए उचित स्थान मिला जबकि दूसरी यात्रा के समय भद्र वेश भी उन्हें उचित स्थान नहीं दिला सका। क्यों ?
इसका मुख्य कारण था - संबंधों का महत्व। तिब्बत में इस मार्ग पर यात्रियों के लिए एक-जैसी व्यवस्थाएँ नहीं थीं। इसलिए वहाँ जान-पहचान के आधार पर ठहरने का उचित स्थान मिल जाता था। पहली बार लेखक के साथ बौद्ध भिक्षु सुमति थे। सुमति की वहाँ जान-पहचान थी। पर पाँच साल बाद बहुत कुछ बदल गया था। भद्र वेश में होने पर भी उन्हें उचित स्थान नहीं मिला था। उन्हें बस्ती के सबसे गरीब झोपड़ी में रुकना पड़ा। यह सब उस समय के लोगों की मनोवृत्ति में बदलाव के कारण ही हुआ होगा। वहाँ के लोग शाम होते हीं छंङ पीकर होश खो देते थे और सुमति भी साथ नहीं थे।

2.उस समय के तिब्बत में हथियार का क़ानून रहने के कारण यात्रियों को किस प्रकार का भय बना रहता था ?
उस समय के तिब्बत में हथियार रखने से सम्बंधित कोई क़ानून नहीं था। इस कारण लोग खुलेआम पिस्तौल बन्दूक आदि रखते थे। साथ हीवहाँ अनेक निर्जन स्थान भी थेजहाँ पुलिस का प्रबंध था खुफिया बिभाग का। वहाँ डाकू किसी को भी आसानी से मार सकते थे। इसीलिए यात्रियों को ह्त्या और लूटमार का भय बना रहता था।

3.लेखक लंग्कोर के मार्ग में अपने साथियों से किस कारण पिछड़ गए थे?
लङ्कोर के मार्ग में लेखक का घोड़ा थककर धीमा चलने लगा था इसलिए लेखक अपने साथियों से पिछड़कर रास्ता भटक गए।

4.लेखक ने शेकर विहार में सुमति को उनके यजमानों के पास जाने से रोकापरन्तु दूसरी बार रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया ?
लेखक ने शेकर विहार में सुमति को उनके यजमानों के पास जाने से इसलिए रोका ताकि वह वहाँ जाकर अधिक समय लगाए। इससे लेखक को एक सप्ताह तक उसकी प्रतीक्षा करनी पड़ती। परन्तु दूसरी बारलेखक को वहाँ के मंदिर में रखी अनेक मूल्यवान हस्तलिखित पुस्तकें मिल गयी थीं। वह एकांत में उनका अध्ययन करना चाहता थे। इसलिए उन्होंने सुमति को यजमानों के पास जाने की अनुमति नहीं दी।

5.अपनी यात्रा के दौरान लेखक को किन कठिनाईयों का सामना करा पड़ा?
लेखक को निम्नलिखित कठिनाइयों का सामना करना पड़ा -
उस समय भारतीयों को तिब्बत यात्रा की अनुमति नहीं थी। इसलिए उन्हें भिखमंगे के रुप में यात्रा करना पड़ी।
चोरी के डर से भिखमंगों को वहाँ के लोग घर में घुसने नहीं देते थे। इसी कारण लेखक को भी ठहरने के स्थान को लेकर कठिनाई का सामना करना पड़ा।
डाँड़ा थोङ्ला जैसी खतरनाक जगह को पार करना पड़ा।
लङ्कोर का रास्ता तय करते समय रास्ता भटक जाने के कारण वे अपने साथियों से बिछड़ गए।

6.प्रस्तुत यात्रा-वृत्तान्त के आधार पर बताइए की उस समय का तिब्बती समाज कैसा था?
तिब्बत का तिंग्री प्रदेश विभिन्न जागीरों में विभक्त था। अधिकतर जागीरें विभिन्न मठों के अधीन था। जागीरों के मालिक खेती का प्रबंध स्वयं करवाते थे। खेती करने के लिए उन्हें बेगार मजदूर मिल जाते थे  सारे प्रबंध की देखभाल कोई भिक्षु करता था। वह भिक्षु जागीर के लोगों में राजा के समान सम्मान पाता था  तिब्बत के समाज में छुआछूतजाती-पाँति आदि कुप्रथाएँ नहीं थी  कोई अपरिचित व्यक्ति भी किसी के घर में अन्दर तक जा सकता था परन्तु  भिखमंगों को चोरी के डर से घर में घुसने नही देते थे।

7. 'मैं अब पुस्तकों के भीतर था 'नीचे दिए गए विकल्पों में से कौन -सा इस वाक्य का अर्थ बतलाता है?
() लेखक पुस्तकें पढ़ने में रम गया।
() लेखक पुस्तकों की शैल्फ़ के भीतर चला गया।
() लेखक के चारों ओर पुस्तकें हैं थीं।
() पुस्तक में लेखक का परिचय और चित्र छपा था।

उत्तर 
() लेखक पुस्तकें पढ़ने में रम गया।

रचना  अभिव्यक्ति

8.सुमति के यजमान और अन्य परिचित लोग लगभग हर गाँव में मिले। इस आधार पर आप सुमति के के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का चित्रण कर सकते हैं?
सुमति के परिचय और सम्मान का दायरा बहुत बड़ा है। तिब्बत के तिंग्री प्रदेश में लगभग हर गाँव में उसके परिचित हैं। वह उनके यहाँ धर्मगुरु के रूप में सम्मानित होता है। लोग उसे आदरपूर्वक घर में स्थान देते हैं। वह सबको बोध गया का गंडा प्रदान करता है। लोग गंडे को पाकर धन्य अनुभव करते हैं।
सुमति स्वभाव से सरलमिलनसारस्नेही और मृदु रहा होगा। तभी लोग उसे उचित आदर देते होंगे।

9.'हालाँकि उस वक्त मेरा भेष ऐसा नहीं था कि उन्हें कुछ भी खयाल करना चाहिए था' - उक्त कथन के अनुसार हमारे आचार-व्यवहार के तरीके वेशभूषा के आधार पर तय होते हैं। आपकी समझ से यह उचित है अथवा अनुचितविचार व्यक्त करें।
हम जब किसी से मिलते हैं तो सामन्यतः उसके वेषभूसे से उसकी पहचान करते हैं। हम अच्छा पहनावा देखकर किसी को अपनाते हैं तो गंदे कपड़े देखकर उसे दुत्कारते हैं। लेखक भिखमंगों के वेश में यात्रा कर रहा था। इसलिए उसे यह अपेक्षा नहीं थी कि शेकर विहार का भिक्षु उसे सम्मानपूर्वक अपनाएगा।
मेरे विचार से यह अनुचित है। अनेक संत-महात्मा और भिक्षु साधारण वस्त्र पहनते हैं किंतु वे उच्च चरित्र के इनसान होते हैं। हम पर पहला प्रभाव वेशभूषा के कारण ही पड़ता है। उसी के आधार पर हम भले-बुरे की पहचान करते हैं। परन्तु अच्छी वेशभूषा में कुतिस्त विचारों वाले लोग भी हो सकते हैं।गरीब व्यक्ति भी चरित्र में श्रेष्ठ हो सकता हैवेशभूषा सब कुछ नहीं है।

10.यात्रा वृत्तांत के आधार पर तिब्बत की भौगोलिक स्थिति का शब्द -चित्र प्रस्तुत करें। वहाँ की स्थिति आपके राज्य/शहर से किस प्रकार भिन्न है ?
तिब्बत एक पहाड़ी प्रदेश है। यहाँ बरफ़ पड़ती है। इसकी सीमा हिमालय पर्वत से शुरू होती है। डाँड़े के ऊपर से समुद्र तल की गहराई लगभग 17-18 हज़ार फीट है। पूरब से पश्चिम की ओर हिमालय के हज़ारों श्वेत शिखर दिखते है। भीटे की ओर दीखने वाले पहाड़ों पर तो बरफ़ की सफ़ेदी थी किसी तरह की हरियाली। उत्तर की तरफ पत्थरों का ढ़ेर था।

12.यात्रा वृत्तांत गद्य साहित्य की एक विधा है आपकी इस पाठ्यपुस्तक में कौन -कौन सी विधाएँ हैं ? प्रस्तुत विधा उनसे किन मायनों में अलग है ?
प्रस्तुत पाठ्यपुस्तक में "महादेवी वर्मा" द्वारा रचित "मेरे बचपन के दिन" संस्मरण है। संस्मरण भी गद्य साहित्य की एक विधा है। इसमें लेखिका के बचपन की यादों का एक अंश प्रस्तुत किया गया है।
यात्रा वृत्तांत तथा संस्मरण दोनों ही गद्य साहित्य की विधाएँ हैं जोकि एक दूसरे से भिन्न है। यात्रा वृत्तांत किसी एक क्षेत्र की यात्रा के अपने अनुभवों पर आधारित है तथा संस्मरण जीवन के किसी व्यक्ति विशेष या किसी खास स्थान की स्मृति पर आधारित है। संस्मरण का क्षेत्र यात्रा वृत्तांत से अधिक व्यापक है। 

13.किसी बात को अनेक प्रकार से कहा जा सकता है ; जैसे -
सुबह होने से पहले हम गाँव में थे।
पौ फटने वाला था कि हम गाँव में थे।
तारों की छाँव रहते -रहते हम गाँव पहुँच गए।
नीचे दिए गए वाक्य को अलग-अलग तरीकों में लिखिए -
जान नहीं पड़ता था कि घोड़ा आगे जा रहा है या पीछे। '

उत्तर
1.  यह पता ही नहीं चल पा रहा था कि घोड़ा चल भी रहा है या नहीं।
2.  कभी लगता था घोड़ा आगे जा रहा हैकभी लगता था पीछे जा रहा है।

14. ऐसे शब्द जो किसी अंचल यानी क्षेत्र विशेष में प्रयुक्त होते हैं उन्हें आंचलिक शब्द कहा जाता है। प्रस्तुत पाठ में से आंचलिक शब्द ढूँढकर लिखिए।
पाठ में आए हुए आंचलिक शब्द -
कुची-कुचीभीटाथुक्पाखोटीराहदारी

15. पाठ में कागज़अक्षरमैदान के आगे क्रमश : मोटेअच्छे और विशाल शब्दों का प्रयोग हुआ है। इन शब्दों से उनकी विशेषता उभर कर आती है। पाठ में से कुछ ऐसे ही और शब्द छाँटिए जो किसी की विशेषता बता रहे हों।
बहुत पिछड़ना , धीमे चलना , कड़ी धूप , ख़ुफ़िया विभाग

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